College at a Glance :: S.V.P College
S.V.P College
Sardar Vallabhbhai Patel College is a unique institution of higher education in Bihar. The College was established in 1957 and converted into a constituent unit of Bihar University in 1976. The college is situated in the heart of the Bhabua town in an area of 15 acres of land. It has double storied buildings accommodating the faculties of science, Management, Social Science, Humanities and Computer Science. The college has earned unique destination in imparting education upto post graduate level in Science. Social Science and Humanities.
भारतरत्न, लौहपुरुष राष्ट्रनिर्माता सरदार वल्ल्भभाई पटेल का संक्षिप्त परिचय :-
१) जन्म स्थान - ननसाल नडियाद ।
२) पिता - झबेर भाई ।
३) नाना - जीजाभाई बरन्ता भाई देसाई ।
४) मामा - डंगर भाई ।
५) माता -
६) भ्राता - सोमाभाई, नरसिंहभाई, बिटठलभाई और काशाभाई ।
७) बहन - डाहीबा
८) पुत्र - डाह्माभाई
९) पुत्री - मणिवेन पटेल
जीवन की विशिष्ट घटनायें :-
१८७५ - ३१ अक्टूबर, जन्म ।
१८९३ - झवेर बा के साथ विवाह ।
१८९७ - नडियाद से हाई स्कूल उत्तीर्ण ।
१९०० - मुखतारी आरम्भ ।
१९०३ - अप्रैल में पुत्री मणिवेन का जन्म ।
१९०५ - २८ नवम्बर को पुत्र डाह्माभाई का जन्म ।
१९०९ - ११ जनवरी को पत्नी का बम्बई में स्वर्गवास ।
१९१० - बैरिस्ट्ररी की पढाई के लिए इंगलैंड को प्रस्थान ।
१९१३ - १३ फरवरी को बैरिस्ट्ररी पास कर बम्बई वापस ।
१९१६ - गांधी जी के साथ प्रथम सम्पर्क ।
१९१७ - खेडा सत्याग्रह में प्रमुख भाग ।
१९२० - ११ जुलाई को गुजरात विद्यापीठ की स्थापना का निश्च्य ।
१९२१ - गुजरात प्रांतीय कांग्रेस कमिटी के प्रथम अध्यक्ष चुने गये । इसी वर्ष सदा के लिए बैरिस्ट्ररी छोडी । दिसम्बर में अहमदाबाद कांग्रेस के स्वागताध्यक्ष चुने गये ।
१९२३ - ९ सितम्बर को नागपुर में सत्याग्रह झण्डा विजय प्राप्त की । दिसम्बर में वोरसद सत्याग्रह में विजय प्राप्त की ।
१९२४ - अहमदाबाद म्युनिसिपैलिटी के चेयरमैन चेने गये ।
१९२७ - अहमदाबाद म्युनिसिपैलिटी के दुवारा चेयरमैन चुने गये । गुजरात बाढ संकट निवारण कार्य ।
१९२८ - २९ फरवरी से बारदोली में सत्याग्रह आरम्भ किया । अक्टूबर वारदोली सत्याग्रह में पूर्ण सफलता प्राप्त की । दिसम्बर में कलकत्ता कांग्रेस अधिवेशन में अभूतपूर्व सम्मान प्राप्त ।
१९३० - ७ मार्च को नमक सत्याग्रह के समय रासगांव में गिरफ्तार और पौने चार मास की कैद । २६ मार्च को स्थानापन्न अध्यक्ष बने । अगस्त में बम्बई में पुन: गिरफ्तार और तीन माह की सजा । दिसम्बर में गिरफ्तार और ९ मास की सजा ।
१९३१ - २५ जनवरी को जेल से मुक्त । मार्च में करांची में कांग्रेस अधिवेशन की अध्यक्षता की ।
१९३२ - ४ जनवरी को महात्मा गांधी सहित गिरफतार और पूना की यरवदा जेल में नजरबंद ।
१९३४ - १४ जनवरी को बिमारी के कारण जेल से मुक्ति पटना में कांग्रेस पार्लियामेंट्री बोर्ड के अध्यक्ष बने ।
१९३५ - २३ मार्च को बोरसद में प्लेग निवारण कार्य आरम्भ किया ।
१९३६ - ८ अप्रैल को कमला नेहरु अस्पताल कोष में दान देने की अपील की । २ जुलाई को पुनर्गठित पार्लियामेंट्री बोर्ड के अध्यक्ष चुने गये तथा कांग्रेस चुनाव संघर्ष का संचालन किया ।
१९४१ - २० अगस्त को बीमारी के कारण रिहाई ।
१९४२ - प्रयाग में कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में प्रथमबार " अंग्रेज चले जाओ " प्रस्ताव प्रस्तुत किया । ९ अगस्त को अन्य नेताओं सहित गिरफ्तार और अहमदनगर जेल में नजरबंद ।
१९४५ - १५ जून को जेल से रिहाई तथा वायसराय द्वारा बुलायी गयी शिमला कांफ्रेन्स में सहभागिता ।
१९४६ - २३ फरवरी को भारतीय नव सेना के विद्रोह को शान्त किया । वायसराय लार्ड बावेल के अनुरोध पर भारत व्यापी डाक को तोडा । २ सितम्बर भारत की अन्तरकालीन सरकार में गृह सदस्य बने । ९ सितम्बर को भारतीय संविधान परिषद में प्रथम बार भाग लिया ।
१९४७ - ४ अप्रैल को वल्लभविद्यानगर में विटठल भाई महाविद्यालय का उद्घघाटन किया । ५ जुलाई को सरदार की अध्यक्षता में देशी राज्यों की समस्याओं को सुलझाने के लिए रियासती विभाग की स्थापना की गयी । १५ अगस्त को सरदार नवीन भारतीय उपनिवेश के उपप्रधान मंत्री तथा गृह मंत्री बने । ९ नवम्बर को सरदार की आजा से जूनगढ पर अधिकार किया गया । १४ नवम्बर को सरदार ने बिहार के नीलगिरी राज्य को अधिकृत करने की आजा दी ।
१९४८ - १३ सितम्बर को सरदार की आजा से हैदराबाद पर चढाई कर उस पर १७ सितम्बर को अधिकार किया गया । ३१ अक्टूवर को उनके १७ वें जन्मदिवस पर उनके बम्बई स्वर्णमय रत्न गठित अशोक स्तम्भ तथा ८०० तोलो चांदी की गांधीजी की मूर्ति भेट की गई । ३ नवम्बर को सरदार को नागपुर विश्वविद्यालय ने विधि के डाक्टर की उपाधि से सम्मानित किया । २५ नवम्बर को उन्हें काशी हिन्दू विश्वविद्यालय ने विधि के डाक्टर की उपाधि प्रदान की । २६ नवम्बर को उन्हें इलाहाबाद मे पंडित गोबिन्द वल्लभ पंत के हाथों पटेल अभिनन्दन ग्रंथ भेंट किया गया । २७ नवम्बर को प्रयाग की मानद उपाधि प्रदान की ।
१९४९ - फरवरी में सरदार जब अपनी दक्षिण भारत मे की यात्रा में हैदराबाद आये तो उनका स्वागत करने के लिए निजाम हवाई अड्डे पर स्वंय आये । उसने अपने जीवन में प्रथम और अतिंम हाथ जोर कर सरदार का अभिवादन किया । २६ फरवरी को उस्मानियां विश्वविद्यालय ने सरदार को विधि के डाक्टर की मानद उपाधि प्रदान की । नेहरु के अमेरिका, कनाडा तथा इंगलैंड की यात्रा पर रहने पर सरदार पटेल ७ अक्टूबर से १५ नवम्बर १९४९ तक भारत के स्थानापन्न प्रधानमंत्री रहें ।
१९५० - २८ अप्रैल को अहमदाबाद आने पर उन्हें १५ लाख रुपये की थैली भेंट की गई । १९ मई को कुमारी अंतरीम जाकर वहां कन्या कुमारी के मंदिर में पूजन । १२ दिसम्बर को वायु परिवर्त्तन के लिए बम्बई गये । १५ दिसम्बर प्रात: काल ९ बजकर ३७ मिनट पर महाप्रयाण ।






